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महाविद्यालय के बारे में


नंद किशोर कैलाश चंद्र महाविद्यालय, जो शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए समर्पित है, कला स्नातक कार्यक्रमों के साथ-साथ प्राणीशास्त्र (Zoology), वनस्पति विज्ञान (Botany) और रसायन विज्ञान (Chemistry) में एम.एससी. की डिग्री प्रदान करता है। हम एक उत्साहवर्धक शिक्षण वातावरण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो तर्कसंगत सोच, रचनात्मकता और व्यक्तिगत विकास को बढ़ावा देता है। हमारा लक्ष्य छात्रों को हमेशा बदलते वैश्विक परिदृश्य में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल से लैस करना है।


महाविद्यालय की स्थापना का उद्देश्य एक पिछड़े क्षेत्र में वैज्ञानिक व वाणिज्यिक शिक्षा के माध्यम से समाज में एक ऐसी युवा पीढ़ी का निर्माण करना है जो वर्तमान में समाज को आधुनिक, भौतिक, सामाजिक और अध्यात्मिक वातावरण के अनुकूल पूर्ण विकसित होकर जीवन की वर्तमान चुनौतियों का सामना सफलतापूर्वक कर सके।

महाविद्यालय का भवन बिसवाॅं - लखनऊ रोड पर बिसवाॅं से 4 कि0मी0 दक्षिण टिकरा में स्थित है, यहां आवश्यक सुविधाओं से युक्त व्याख्यान कक्षायें, पुस्तकालय, वाचनालय, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जन्तु विज्ञान व वनस्पति विज्ञान की आधुनिक व प्रायोगिक उपकरणों से युक्त प्रयोगशालायें, प्रशासनिक भवन, प्राचार्य कक्ष, सहायक आचार्य कक्ष, बालक बालिका कक्ष, कम्प्यूटर कक्ष, प्रतीक्षा कक्ष पर्याप्त फर्नीचर व बड़ा खेल मैदान है।

वर्तमान सत्र में महाविद्यालय में स्नातक स्तर पर विज्ञान संकाय के अन्र्तगत बी0एस0सी0 (बायो) व (मैथ्स) तथा वाणिज्य संकाय के अन्र्तगत बी0काम0 पाठ्यक्रम की सहशिक्षा (बालक एवं बालिकाएं) प्रदान की जा रही है।

नन्द किशोर कैलाश चन्द्र महाविद्यालय दो ऐसी सामाजिक, शैक्षिक आत्माओं का संगम है जो समाज में शिक्षा के प्रचार-प्रसार के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन की कामना अपने मन-मानस में संजोये हुये थे। श्रीमती सरोज वर्मा जी अपने पूज्य पुण्यलोक स्वशुर स्व0 नन्द किशोर तथा श्री राकेश वर्मा जी अपने पूज्य पिता पुण्यलोक स्व0 कैलाशचन्द्र की स्मृति में सीतापुर जनपद में बिसवाॅं से 4 कि0मी0 दक्षिण टिकरा में स्थापित किया। क्षेत्र में महाविद्यालय की स्थापना विज्ञान वर्ग की उच्च शिक्षा से वंचित ऐसे बच्चे जो इण्टरमीडिएट की शिक्षा के उपरान्त बी0एस0सी0 व बी0काम0 करने की भावनाएं अपने मन में संजोए, साधन-सुविधा क अभाव में साकार एवं मूर्तरूप नहीं ले पा रही हैं उनको वैज्ञानिक व वाणिज्यिक शिक्षा के माध्यम से शिक्षित कर क्षेत्र के विकास की मुख्य धारा से जोड़ना है जिससे कि भूमण्डलीकरण के इस दौर में ग्रामीण अंचल के बच्चे बदलते हुए आधुनिक शैक्षिक परिवेश में अपने को ढाल सकें तथा प्रगति के शिखरों पर आरोहित हो कर अपने वर्तमान और भविष्य को नई दिशा एवं आयाम दे सकें।